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15वें वित्त आयोग घोटाले में कार्रवाई क्यों ठप? करोड़ों की अनियमितता पर एक माह बाद भी FIR नहीं, आदेश के बाद भी फाइलें अटकीं

15वें वित्त आयोग घोटाले में कार्रवाई क्यों ठप? करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं पर एक माह बाद भी FIR नहीं

 जिला पंचायत CEO के निर्देश के बावजूद जनपद से थाने तक नहीं पहुंचा पत्र ,जनपद CEO बोले- “जांच रिपोर्ट मंगाई है, एक-दो दिन में FIR कराएंगे”

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। 15वें वित्त आयोग की राशि में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा लगभग एक माह पहले ग्राम पंचायत पूटा, टीकरखुर्द, आमगांव, गांगपुर, साल्हेघोरी, पंडरीपानी और खोडरी के जिम्मेदार अधिकारियों, तत्कालीन पंचायत सचिवों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद जनपद पंचायत गौरेला की ओर से अब तक संबंधित थाने में एफआईआर के लिए आवेदन तक नहीं भेजा गया है।

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मामला करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच पूरी होने और एफआईआर के स्पष्ट निर्देश जारी होने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ना कई सवाल खड़े कर रहा है। उक्त मामले में सूत्र बताते हैं की, इस बीच सातों ग्राम पंचायतों के तत्कालीन सरपंचों और पंचायत सचिवों की बैठक बुलाए जाने तथा कथित लेन देन की भी चर्चा रहा, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, जांच से पता चल पाएगा 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। उनका कहना है कि यदि छोटे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं में एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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इस मामले में जिला पंचायत CEO से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

वहीं जनपद पंचायत गौरेला के CEO ने कहा कि “एफआईआर के लिए जिला पंचायत से पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन जांच रिपोर्ट मेरे पास उपलब्ध नहीं थी। यह मामला पूर्व CEO के कार्यकाल का है। जिला पंचायत से जांच रिपोर्ट मंगवाई गई है। एक-दो दिन में संबंधित थाने को एफआईआर के लिए पत्र भेज दिया जाएगा।”

सरपंच संघ गौरेला के अध्यक्ष तूफान सिंह ने आरोप लगाया कि “पहले भी जिला पंचायत CEO द्वारा एफआईआर के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन साइबर सेल जांच का हवाला देकर बाद में वह आदेश वापस ले लिया गया। हाल ही में लगभग एक माह पहले फिर से एफआईआर के आदेश हुए, लेकिन आज तक मामला थाने नहीं भेजा गया। यह केवल जिम्मेदार लोगों को बचाने और मामले को घुमाने का प्रयास है।”

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और जिला पंचायत CEO के आदेश भी जारी हो चुके हैं, तो आखिर एफआईआर दर्ज कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर कार्रवाई को जानबूझकर टालने का प्रयास?

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